राम हमारे आदर्श


                   

 रोम - रोम    में    राम    रमे    हैं,
 कण - कण   में   माँ    सीता  हैं।
 राष्ट्र    हमारा     पावन     मंदिर,
 उर    गो,    गंगा,    गीता     हैं।।

 धर्म   सनातन   हम   सबका  है,
 विश्व - वंधु      का     नारा     है।
 सत्य-अहिंसा    अस्त्र-शस्त्र    है,
 अनुपम     देश     हमारा     है।।

 सबका   है   सम्मान   यहाँ   पर,
 सादर     स्नेह     समर्पण      है।
 विश्वगुरू   इस   मातृ-भूमि   पर,
 तन, मन,  धन  सब  अर्पण  है।।

 'सियाराममय सब जग' कह कर,
 सबका   नमन    धरा    पर    है।
 विविध  सुमन-दल  से   सुरभित,
 यह  उपवन   वसुंधरा   पर   है।।

 'सत्यमेव   जयते'   सदियों    से,
 अपना      शाश्वत     नारा     है।
 राम   सदा   विजयी    होते    हैं,
 सदा      दशानन     हारा     है।।

 मिस्र,   रोम,   यूनान   मिट  गये,
 भारत      तो      ध्रुवतारा      है।
 अवनी पर अभिराम, अलौकिक,
 आर्यावर्त         हमारा         है।।